
न्यूज डेस्क आगरा मीडिया ::.उदयपुर। पूर्व केन्द्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा ने कहा है कि नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) की जरूरत ही नहीं थी, यह सिर्फ बिगड़ती अर्थव्यवस्था से ध्यान भटकाने के लिए लाया गया। मैं दस्तावेज नहीं दिखाऊंगा आप भी मत दिखाना।
सिन्हा सोमवार सुबह उदयपुर में पत्रकारों से मुखातिब थे। रविवार रात यहां गांधी शांति यात्रा को लेकर पहुंचे सिन्हा की कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने अगवानी की थी और प्रबुद्धजनों से परिचर्चा का कार्यक्रम भी हुआ था। सोमवार सुबह प्रेसवार्ता में सिन्हा ने बताया कि इस कानून से पहले भी यह व्यवस्था थी कि नागरिकता प्रदान करना केन्द्र सरकार के हाथ में ही था। उसे अब धर्म के आधार से जोड़ दिया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि 25 साल पहले भारत आ चुका व्यक्ति कैसे साबित करेगा कि उसके साथ धार्मिक प्रताडऩा हुई थी, क्योंकि उसके पास इसका कोई सबूत उपलब्ध नहीं होगा। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि इस बात की क्या गारंटी है कि 31 दिसम्बर 2014 के बाद पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में धार्मिक प्रताडऩा नहीं हुई होगी और सीएए में वर्णित धर्मों का कोई भी व्यक्ति भारत नहीं आना चाहेगा। सिन्हा ने यह भी आरोप लगाया कि सीएए में चीन का नाम क्यों नहीं लिया गया। उन्होंने साफ कहा कि चीन से हम डरते हैं। उन्होंने कहा कि क्या तिब्बत की समस्या से केन्द्र की मोदी सरकार अनभिज्ञ है।
उन्होंने कहा कि संसद में गृहमंत्री अमित शाह ने ऐलान किया कि वे चुन-चुन कर घुसपैठियों को बाहर करेंगे। इसके लिए उन्हें पहले घुसपैठियों की पहचान तो करनी ही होगी और उसके लिए एनआरसी की प्रक्रिया ही अपनाई जाएगी। ऐसे में यदि केन्द्र सरकार के प्रमुख यदि ये कह रहे हैं कि एनआरसी लागू नहीं करेंगे तो यह उसी तरह भ्रमित करने जैसा है जैसा नोटबंदी में किया गया था। तब कहा गया था कि इससे कालाधन बाहर आएगा, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि पिछले टर्म और मौजूदा टर्म में सरकार को जब-जब भी मूल मुद्दों से ध्यान भटकाना होता है, सरकार ऐसे शगूफे ले आती है। यह सरकार सिर्फ चुनावों में अपने फायदे के दृष्टिकोण से कार्य कर रही है।
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