
न्यूज डेस्क आगरा मीडिया ::.नई दिल्ली । राजस्थानी लोक नृत्य, लेखन एवं चित्रकला को दिल्ली तक पहुंचाने वाले रामनिवास लखोटिया का सोमवार तड़के राष्ट्रीय राजधानी में निधन हो गया। राम निवास लखोटिया राजस्थान अकादमी के संस्थापक चेयरमैन और देश के मशहूर पेशेवर चार्टेड एकाउंटेंट भी थे। वे लंबे समय से बीमार चल रहे थे। उन्होंने अंतिम सांस देश की राजधानी उसी दिल्ली में ली, जिस दिल्ली में उन्होंने राजस्थान की पहचान बनाने के लिए पूरा जीवन समर्पित कर दिया।
सोमवार को आईएएनएस को यह जानकारी राजस्थान अकादमी के अध्यक्ष गौरव गुप्ता व राम निवास लखोटिया के पोते सत्यप्रिय लखोटिया ने एक संयुक्त बयान में दी। उन्होंने बताया, "राम निवास लखोटिया ने रात करीब 2 बजे अंतिम सांस भी दिल्ली में ही ली। उसी दिल्ली में जहां राजस्थानी संस्कृति को पहुंचाने के लिए उन्होंने पूरा जीवन समर्पित कर दिया था। जीवन के अंतिम दिनों में राम निवास लखोटिया इस बात से बेहद संतुष्ट नजर आते थे कि वे राजस्थानी नृत्य, लोक कला, संस्कृति-शिक्षा आचार-विचारों को जीवन में दिल्ली तक पहुंचा सके।"
राम निवास लखोटिया के पारिवारिक मित्र और सिप्रा के पूर्व अध्यक्ष गोपेंद्र नाथ भट्ट ने आईएएनएस से कहा, "इस दुखद समाचार को सुनते ही राजस्थान राज्य से और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में मौजूद प्रवासी राजस्थानियों में शोक की लहर दौड़ गई। लखोटिया के देहांत पर सुरेश खंडेलवाल, के.के. नरेड़ा, मुकेश अग्रवाल, वीरेंद्र मेहता, प्रकाश बिहानी आदि ने उनके परिवारजनों को शोक संवेदनाएं भेजीं।"
राम निवास लखोटिया के शुभचिंतकों के मुताबिक, "राम निवास लखोटिया एक चिंतक, लेखक और विचारक थे। उन्होंने दिवंगत पुत्र और देश के मशहूर कर-सलाहकार सुभाष लखोटिया की याद में श्रवण कुमार पुरस्कार की शुरुआत करवाई थी। इस पुरस्कार की खास बात थी कि एक लाख जैसी बड़ी धनराशि वाला यह पुरस्कार हर साल उसी संतान (पुत्र या पुत्री) को दिया जाता था, जिसने माता-पिता की निस्वार्थ सेवा की हो।"
--आईएएनएस
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