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रविवार, 19 जनवरी 2020

मंत्रियों को बिना बताए सीएम को सीधे फाइल भेज रहे अफसर, मुख्यमंत्री योगी ने खुद किया खुलासा,


yogi adityanath न्यूज डेस्क  आगरा मीडिया  ::.प्रदेश के वरिष्ठ प्रशासनिक अफसर मंत्री को बताए बिना बजट संबंधी फाइलें सीधे मुख्यमंत्री को भेज रहे हैं। इतना ही नहीं, वे जनप्रतिनिधियों से ठीक से बात भी नहीं करते हैं। इससे परेशान लोग जब शिकायत करते हैं तो अफसर उसी कर्मी से रिपोर्ट मांग लेते हैं, जिनकी शिकायत की जाती है। इसी तरह कई विभागों में भ्रष्टाचार की शिकायतें हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।
ये बातें किसी और ने नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने खुद कही है। वे पिछले दिनों अपर मुख्य सचिवों और प्रमुख सचिव की बैठक ले रहे थे। इस दौरान उन्होंने अफसरों को कार्यप्रणाली बदलने की सख्त हिदायत दी।

इस मीटिंग के निर्देश जारी होने के बाद अब दूसरे अफसरों में यह चर्चा का विषय बना हुआ है। मुख्यमंत्री ने खुलासा किया कि अफसर बजट की फाइलों पर विभागीय मंत्री से अनुमोदन लिए बिना ही उन्हें भेज देते हैं। जब विभागीय मंत्री से पूछा जाता है तो वे कहते हैं, उन्हें कोई जानकारी नहीं है।

मुख्यमंत्री ने इस पर ऐतराज जताते हुए सख्त हिदायत दी है कि बजट संबंधी पत्रावलियों पर मंत्री का अनुमोदन लेने के बाद ही उनके पास भेजा जाय। उन्होंने विभागवार वित्तीय स्वीकृतियों की भी पड़ताल की। हर विभाग की पोल खोली और सुधार करने के निर्देश भी दिए।
जनप्रतिनिधि ही नहीं, आम आदमी की भी सुनें
सीएम ने कहा कि अधिकारी जनप्रतिनिधियों से ठीक बात नहीं करते हैं, यह स्थिति ठीक नहीं है। उन्होंने आगाह किया कि वे मेरिट के आधार पर काम करें और जनप्रतिनिधि को बताएं। उन्होंने कहा कि अफसरों का बातचीत व व्यवहार ठीक होना चाहिए। उन्हें आम आदमी की बातें सुननी चाहिए, उनसे मिलना चाहिए।

भ्रष्टाचार को रोकें और कठोर कार्रवाई करें
सीएम ने कहा, कुछ विभागों में भ्रष्टाचार की उन्हें पूरी जानकारी है। इस पर अंकुश लगाने की आवश्यकता है। शासन स्तर, विभाग स्तर व जिला स्तर पर कार्यपद्धति में पारदर्शिता होनी चाहिए। प्रभारी मंत्री, अपर मुख्य सचिव व प्रमुख सचिव की जिम्मेदारी है कि उस पर रोक लगाते हुए कठोर कार्रवाई करें, जिसका संदेश निचले स्तर तक जाए।

6-6 माह तक दबी रहती हैं फाइलें
मुख्यमंत्री ने फाइलें दबाने की प्रवृत्ति न छोड़ने का भी खुलासा किया। कहा, पत्रावलियां तीन दिन में निस्तारित करने के निर्देश है। इसके बावजूद यह छह-छह महीने तक पड़ी रहती हैं। यह स्थिति लगभग हर विभाग की है। उन्होंने कहा कि पत्रावलियां समय से निस्तारित की जाएं, वरना देरी पर कठोर कार्रवाई की जाए।

जिसकी शिकायत, उसी से जांच, अब नहीं चलेगा
मुख्यमंत्री ने कहा कि सीएम हेल्पलाइन, आईजीआरएस से जुड़े मामलों की समीक्षा समय से नहीं हो रही है। काफी शिकायतें पेंडिंग हैं। इनका निस्तारण समयबद्ध होना चाहिए। शिकायतों की जांच एक स्तर के ऊपर के अधिकारी से कराई जानी चाहिए। जबकि देखने में आ रहा है कि जिस अधिकारी की शिकायत होती है, उसी से जांच रिपोर्ट मांगी जाती है। यह स्थिति चिंताजनक है।
प्रधानमंत्री आवास योजना : छह माह पहले प्राथमिकता तय होनी चाहिए, नहीं की गई
सीएम को पता चला कि प्रदेश में पीएम ग्रामीण आवास योजना की स्थिति बेहद खराब है। ग्राम पंचायतों के खाते में 1500 करोड़ रुपये पड़ी हैं। छह माह पहले प्राथमिकताएं तय होनी चाहिए थी, लेकिन नहीं हुई। ग्राम प्रधान पैसा खर्च नहीं कर पा रहे हैं।

निर्देश हुआ कि अगर खर्च नहीं कर पा रहे हैं तो इस धनराशि से बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में खेलकूद, गांवों के ड्रेनेज सिस्टम व पार्कों का निर्माण किया जाए ताकि लोगों को रोजगार मिल सके।

मुख्यमंत्री ने प्रमुख सचिव ग्राम्य विकास व पंचायतीराज को खातों में पड़ी धनराशि खर्च करने के लिए समय सीमा तय करने व ग्राम पंचायतों से प्रस्ताव मांगने के निर्देश दिए। यह भी कहा कि सांसद निधि व विधायक निधि की धनराशि को खर्च करने में डेढ़ माह से अधिक समय नहीं लगना चाहिए। डीएम व सीडीओ विधायकों को पत्र भेजकर प्रस्ताव मांगे। इसके लिए नई गाइडलाइन भी बनाई जा रही है।
उद्योगों के विकास के लिए अधिकारी गंभीर नहीं
मुख्यमंत्री योगी ने कहा, यह संज्ञान में आया है कि प्रदेश में उद्योगों की स्थिति बहुत ही खराब है। आम लोगों की धारणा है कि सरकार उद्योगों का विकास नहीं करना चाहती है। नौकरशाही के चलते सारे प्रोजेक्ट फेल हो रहे हैं, वे इसे लेकर गंभीर नहीं हैं।

नोएडा व ग्रेटर नोएडा के ऑडिट कराने जाने के आदेश दिए गए थे, लेकिन अभी तक नहीं हुआ है। इसलिए सीईओ को इस बाबत पुन: लिखा जाए। उद्योगों के विकास में बाधा नहीं आनी चाहिए।

गोल्डन कार्ड नहीं बंट रहे, सीएमओ नहीं कर रहे काम
प्रदेश में आयुष्मान योजना की प्रगति बेहद धीमी है। इसके तहत आम आदमी को गोल्डन कार्ड वितरित नहीं हुए हैं। वहीं जिलों में सीएमओ भी काम नहीं कर रहे हैं। सीएम ने कहा, इसे देखना होगा और जवाबदेही तय करनी होगी। योजना में अधिक से अधिक गोल्डन कार्ड बनाए जाएं और समय से उपयोगिता प्रमाणपत्र भेजा जाए।

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